केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) विभिन्न कारकों के कारण विश्वसनीयता और भरोसे के संकट का सामना कर रहा है। इस संकट के कारणों और परिणामों का विश्लेषण कीजिये तथा CBI के संदर्भ में सार्वजनिक विश्वास एवं प्रतिष्ठा को बहाल करने के उपायों का सुझाव दीजिये। UPSC NOTE

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) भारत की प्रमुख जाँच एजेंसी है जिसे भ्रष्टाचार निवारण हेतु संथानम समिति की सिफारिश पर स्थापित किया गया था। यह भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराधों, विशेष अपराधों आदि के मामलों का निवारण करती है। वर्ष 2013 में सर्वोच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने कहा कि सीबीआई ‘’पिंजरे में बंद ऐसा तोता बन गई है जो अपने मालिक की बोली बोलता है।

हाल के वर्षों में, CBI विश्वसनीयता और भरोसे के संकट का सामना कर रही है। इस संकट के कई कारण हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • राजनीतिक हस्तक्षेप:
    • सीबीआई को अक्सर अपने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने या अपने सहयोगियों का पक्ष लेने के लिये केंद्र सरकार के एक उपकरण के रूप में देखा जाता है।
    • सीबीआई की जाँच सत्ताधारी दल या गठबंधन के राजनीतिक विचारों और दबावों से प्रभावित होती है। यह इसकी निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता को प्रभावित करता है तथा सार्वजनिक छवि को खराब करता है।
  • अनियमितताएँ: CBI में कई अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। इनमें भ्रष्टाचार, अनुचित व्यवहार और जांच में लापरवाही शामिल हैं।
  • जाँचों में कमी: CBI की जाँच में अक्सर कमी आती है। कई मामलों में आरोपी को बरी कर दिया जाता है या उन्हें कम सजा मिलती है।

इन कारणों के कारण, CBI की सार्वजनिक छवि खराब हुई है। लोगों का मानना ​​है कि CBI निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर रही है।

CBI के विश्वसनीयता और भरोसे के संकट के परिणाम निम्नलिखित हैं:

हाल ही के वर्षों में कई विवादों और घोटालों में घिरे होने के कारण सीबीआई की विश्वसनीयता और विश्वास में गंभीर रूप से कमी आई है।

  • भ्रष्टाचार और अन्य अपराधों में वृद्धि: CBI की विश्वसनीयता में कमी आने से भ्रष्टाचार और अन्य अपराधों में वृद्धि हो सकती है। लोग CBI पर भरोसा नहीं करते हैं, इसलिए वे अपराधों की रिपोर्ट करने से हिचकिचाते हैं।
  • कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ना: CBI की विश्वसनीयता में कमी आने से कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। लोग CBI पर भरोसा नहीं करते हैं, इसलिए वे कानून का पालन करने में कम रुचि रखते हैं।

CBI के संदर्भ में सार्वजनिक विश्वास एवं प्रतिष्ठा को बहाल करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

  • CBI को राजनीतिक दबाव से मुक्त करना: CBI को राजनीतिक दबाव से मुक्त करने के लिए, इसके संचालन को पूरी तरह से स्वतंत्र बनाना आवश्यक है। CBI की नियुक्ति और कार्यकाल स्वतंत्र निकायों द्वारा निर्धारित किया जाना चाहिए।
  • CBI में अनियमितताओं को रोकना: CBI में अनियमितताओं को रोकने के लिए, एक मजबूत निगरानी प्रणाली की आवश्यकता है। CBI की जाँचों को नियमित रूप से स्वतंत्र निकायों द्वारा समीक्षा किया जाना चाहिए।
  • CBI की जाँचों की गुणवत्ता में सुधार करना: CBI की जाँचों की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए, CBI के अधिकारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण और संसाधन प्रदान किए जाने चाहिए। CBI को एक आधुनिक और प्रभावी तकनीक का उपयोग करने की आवश्यकता है।

इन उपायों को लागू करने से CBI की विश्वसनीयता और भरोसे को बहाल करने में मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष:

सीबीआई भ्रष्टाचार से लड़ने, जवाबदेही सुनिश्चित करने और न्याय देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालाँकि, सीबीआई विभिन्न कारकों के कारण विश्वसनीयता और आत्मविश्वास के संकट का सामना कर रही है, जिसने इसकी स्वतंत्रता, व्यावसायिकता और अखंडता को कमज़ोर कर दिया है। इसलिये इस संकट के कारणों और परिणामों को संबोधित करते हुए ऊपर सुझाए गए उपायों को लागू कर सीबीआई में सुधार करने की आवश्यकता है। यह सीबीआई के सार्वजनिक विश्वास और प्रतिष्ठा को बहाल करेगा और इसे अपने जनादेश तथा मिशन को प्रभावी ढंग एवं कुशलता से पूरा करने को सक्षम बनाएगा।

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